समिति ने की सिफारिश, Corona मरीजों का इलाज करने के लिए इतना होना चाहिए निजी अस्पतालों का रेट
रिपोर्ट की सिफारिश के मुताबिक, साधारण आइसोलेशन बेड के लिए अस्पतालों को 8,000-10,000 रुपए प्रतिदिन चार्ज करना चाहिए. इसी तरह ICU (बिना वेंटीलेटर) के 13,000 से 15,000, ICU (वेंटीलेटर के साथ) के लिए 15,000 से 18,000 रुपए प्रतिदिन हो. इसी में PPE का खर्च शामिल होगा.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) के निर्देश पर बनाई गई डॉ. वीके पॉल समिति (VK Paul Committee) ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. इस समिति ने प्राइवेट अस्पतालों (private hospitals) में 60% बेड्स पर कोरोना मरीजों के लिए सस्ते इलाज की सिफारिश की है. रिपोर्ट में रेट को लेकर की गई सिफारिश के मुताबिक, साधारण आइसोलेशन बेड के लिए अस्पतालों को 8,000-10,000 रुपए प्रति दिन के हिसाब से चार्ज करना चाहिए. इसी तरह ICU बिना वेंटीलेटर के 13,000 से 15,000, ICU वेंटीलेटर के साथ 15,000 से 18,000 रुपए प्रतिदिन हो. इसी में PPE का खर्च शामिल होगा. फिलहाल प्राइवेट अस्पतालों में प्रतिदिन साधारण आइसोलेशन बेड के लिए 24,000-25,000 रुपए, ICU बिना वेंटीलेटर के 34,000-43,000 रुपए और ICU वेंटीलेटर के साथ के लिए 44,000 से 54000 वसूले जा रहे हैं. इसके अलावा अभी प्राइवेट अस्पताल PPE का चार्ज अलग से कैटेगरी के हिसाब से चार्ज कर रहे हैं.
पैकेज सिस्टम के बारे में ये सिफारिश
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस रेट पर भी प्राइवेट हॉस्पिटल बेड के लिए सिफारिश की जाएगी, वह एक पैकेज की तरह होगा. यानी इसमें सब शामिल होगा. जैसे बेड, खाना, निगरानी, नर्सिंग केयर डॉक्टर की विजिट या कंसल्टेशन, इमेजिंग जैसी इन्वेस्टिगेशन, ऑक्सीजन, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, पुरानी गंभीर बीमारी आदि. रिपोर्ट में खासतौर से बताया गया है कि जिन लोगों को गंभीर बीमारी भी होगी जैसे कि हाइपरटेंशन, डायबिटीज, दिल की बीमारी आदि... यह सब पैकेज का हिस्सा होंगी. जब तक कोरोना का इलाज चलेगा
अस्पताल कुछ अलग से चार्ज नहीं कर सकेगा. इसका सीधा मतलब यह है कि समिति ने रोजाना प्रति बेड रेट्स की जो सिफारिश की है, पूरा पैकेज उसी आधार पर अस्पताल को बनाना होगा.
उदाहरण के लिए समिति ने आइसोलेशन बेड ( सपोर्टिव केयर और ऑक्सीजन शामिल) के लिए रोजाना ₹10,000 का रेट तय किया है. अगर मरीज 14 दिन तक अस्पताल में रहता है तो इस हिसाब से पैकेज ₹1,40,000 का होगा. समिति की सिफारिश के मुताबिक, कोरोना मरीज बच्चे के लिए भी यही रेट लागू होंगे. प्रेग्नेंट महिला की डिलीवरी इन रेट में कवर नहीं होगी. सिफारिश किए गए रेट में डायग्नोस्टिक टेस्ट के खर्च शामिल नहीं हैं.
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस रेट पर भी प्राइवेट हॉस्पिटल बेड के लिए सिफारिश की जाएगी, वह एक पैकेज की तरह होगा. यानी इसमें सब शामिल होगा. जैसे बेड, खाना, निगरानी, नर्सिंग केयर डॉक्टर की विजिट या कंसल्टेशन, इमेजिंग जैसी इन्वेस्टिगेशन, ऑक्सीजन, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, पुरानी गंभीर बीमारी आदि. रिपोर्ट में खासतौर से बताया गया है कि जिन लोगों को गंभीर बीमारी भी होगी जैसे कि हाइपरटेंशन, डायबिटीज, दिल की बीमारी आदि... यह सब पैकेज का हिस्सा होंगी. जब तक कोरोना का इलाज चलेगा
अस्पताल कुछ अलग से चार्ज नहीं कर सकेगा. इसका सीधा मतलब यह है कि समिति ने रोजाना प्रति बेड रेट्स की जो सिफारिश की है, पूरा पैकेज उसी आधार पर अस्पताल को बनाना होगा.
उदाहरण के लिए समिति ने आइसोलेशन बेड ( सपोर्टिव केयर और ऑक्सीजन शामिल) के लिए रोजाना ₹10,000 का रेट तय किया है. अगर मरीज 14 दिन तक अस्पताल में रहता है तो इस हिसाब से पैकेज ₹1,40,000 का होगा. समिति की सिफारिश के मुताबिक, कोरोना मरीज बच्चे के लिए भी यही रेट लागू होंगे. प्रेग्नेंट महिला की डिलीवरी इन रेट में कवर नहीं होगी. सिफारिश किए गए रेट में डायग्नोस्टिक टेस्ट के खर्च शामिल नहीं हैं.
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क्या कहती है दिल्ली सरकार
दिल्ली सरकार का कहना है अगर यह सिफारिश यूं ही मान ली गई तो इससे यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकेगा कि अस्पताल किस मरीज को सस्ते में इलाज दे रहा है. दिल्ली सरकार ने सुझाव दिया है कि जो बड़े प्राइवेट अस्पताल पूर्ण रूप से कोरोना का इलाज कर रहे हैं, वहां सभी बेड सस्ते रेट पर उपलब्ध हों जबकि जो अस्पताल आंशिक रूप से कोरोना का इलाज कर रहे हैं, वहां इस समय उनकी कुल क्षमता के 40 फीसदी बेड ही कोरोना के इलाज में लगे हैं. 40 फीसदी बेड्स को बढ़ाकर 60 फीसदी किया जाए और यह सभी सस्ते में उपलब्ध हो जिससे किसी तरह की कोई भ्रम की स्थिति न हो और आसानी से आम आदमी के लिए सस्ता इलाज सुनिश्चित किया जा सके.
सरकार और एलजी में नहीं बन पाई सहमति
इस मुद्दे पर उपराज्यपाल अनिल बैजल और दिल्ली सरकार में सहमति नहीं बन पाई, जिसके बाद 12:00 बजे की डीडीएमए की बैठक रोकनी पड़ी और अब यह बैठक शाम 5:00 बजे होगी.
दिल्ली सरकार का कहना है अगर यह सिफारिश यूं ही मान ली गई तो इससे यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकेगा कि अस्पताल किस मरीज को सस्ते में इलाज दे रहा है. दिल्ली सरकार ने सुझाव दिया है कि जो बड़े प्राइवेट अस्पताल पूर्ण रूप से कोरोना का इलाज कर रहे हैं, वहां सभी बेड सस्ते रेट पर उपलब्ध हों जबकि जो अस्पताल आंशिक रूप से कोरोना का इलाज कर रहे हैं, वहां इस समय उनकी कुल क्षमता के 40 फीसदी बेड ही कोरोना के इलाज में लगे हैं. 40 फीसदी बेड्स को बढ़ाकर 60 फीसदी किया जाए और यह सभी सस्ते में उपलब्ध हो जिससे किसी तरह की कोई भ्रम की स्थिति न हो और आसानी से आम आदमी के लिए सस्ता इलाज सुनिश्चित किया जा सके.
सरकार और एलजी में नहीं बन पाई सहमति
इस मुद्दे पर उपराज्यपाल अनिल बैजल और दिल्ली सरकार में सहमति नहीं बन पाई, जिसके बाद 12:00 बजे की डीडीएमए की बैठक रोकनी पड़ी और अब यह बैठक शाम 5:00 बजे होगी.